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mahabharat 3.12.126: 'क्योंकि तुम सब लोग नीच मनुष्यों द्वारा मेरे साथ किए गए अपमान को इस प्रकार अनदेखा कर रहे हो, मानो तुम्हारे हृदय में उसका किंचितमात्र भी शोक नहीं है। उस समय कर्ण ने मुझ पर जो उपहास किया था, उसका शोक मेरे हृदय से दूर नहीं होता॥126॥   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 126
 
 
श्लोक  3.12.126 
ये मां विप्रकृतां क्षुद्रैरुपेक्षध्वं विशोकवत्।
न च मे शाम्यते दु:खं कर्णो यत् प्राहसत् तदा॥ १२६॥
 
 
अनुवाद
'क्योंकि तुम सब लोग नीच मनुष्यों द्वारा मेरे साथ किए गए अपमान को इस प्रकार अनदेखा कर रहे हो, मानो तुम्हारे हृदय में उसका किंचितमात्र भी शोक नहीं है। उस समय कर्ण ने मुझ पर जो उपहास किया था, उसका शोक मेरे हृदय से दूर नहीं होता॥126॥
 
'Because all of you are ignoring the insult that I was subjected to by lowly men, as if you do not have even a little sorrow for it in your heart. The sorrow that Karna had laughed at me at that time does not go away from my heart.॥ 126॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)