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mahabharat 3.12.124: द्रौपदी क्रोधित हो गई और बार-बार रोती हुई और आँसू पोंछती हुई अश्रुपूर्ण वाणी से बोली-॥124॥   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 124
 
 
श्लोक  3.12.124 
चक्षुषी परिमार्जन्ती नि:श्वसन्ती पुन: पुन:।
बाष्पपूर्णेन कण्ठेन क्रुद्धा वचनमब्रवीत्॥ १२४॥
 
 
अनुवाद
द्रौपदी क्रोधित हो गई और बार-बार रोती हुई और आँसू पोंछती हुई अश्रुपूर्ण वाणी से बोली-॥124॥
 
Draupadi became angry and while sobbing and wiping her tears again and again, spoke with a tearful voice -॥ 124॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)