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mahabharat 3.12.121: मधुसूदन श्रीकृष्ण! मैं पतिव्रता और पतिव्रता स्त्री होते हुए भी पाँचों पाण्डवों के सामने मेरे केशों को पकड़कर घसीटा गया ॥121॥   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 121
 
 
श्लोक  3.12.121 
कचग्रहमनुप्राप्ता सास्मि कृष्ण वरा सती।
पञ्चानां पाण्डुपुत्राणां प्रेक्षतां मधुसूदन॥ १२१॥
 
 
अनुवाद
मधुसूदन श्रीकृष्ण! मैं पतिव्रता और पतिव्रता स्त्री होते हुए भी पाँचों पाण्डवों के सामने मेरे केशों को पकड़कर घसीटा गया ॥121॥
 
Madhusudan Sri Krishna! Even though I am a virtuous and chaste woman, I was dragged by my hair in front of the five Pandavas. ॥ 121॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)