Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.12.119: मैं अत्यन्त दुर्बल और पापकर्मों में संलग्न अपने पापी शत्रुओं द्वारा दिए गए ऐसे कष्टों को सहन कर रहा हूँ और दीर्घकाल से चिन्ता की अग्नि में जल रहा हूँ॥119॥ | mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं अत्यन्त दुर्बल और पापकर्मों में संलग्न अपने पापी शत्रुओं द्वारा दिए गए ऐसे कष्टों को सहन कर रहा हूँ और दीर्घकाल से चिन्ता की अग्नि में जल रहा हूँ॥119॥
I am enduring such hardships inflicted by my sinful enemies who are extremely weak and engaged in sinful activities, and I am burning in the fire of worry for a long time.॥ 119॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥