श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 116
 
 
श्लोक  3.12.116 
एवं सुयुद्धे पार्थेन जिताहं मधुसूदन।
स्वयंवरे महत् कर्म कृत्वा न सुकरं परै:॥ ११६॥
 
 
अनुवाद
मधुसूदन! स्वयंवर में जो महान् कर्म दूसरों के लिए कठिन था, उसे करके अर्जुन ने विशाल युद्ध में भी मुझे जीत लिया ॥116॥
 
Madhusudan! In the swayamvara, by performing the great deed which was difficult for others, Arjuna conquered me even in a huge war. ॥ 116॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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