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mahabharat 3.12.115: हे श्रीकृष्ण! जिस प्रकार आपने भीष्म की पुत्री रुक्मिणी को जीत लिया था, उसी प्रकार धर्मात्मा अर्जुन ने पिता की राजधानी में रहते हुए मुझे जीत लिया।   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 115
 
 
श्लोक  3.12.115 
लब्धाहमपि तत्रैव वसता सव्यसाचिना।
यथा त्वया जिता कृष्ण रुक्मिणी भीष्मकात्मजा॥ ११५॥
 
 
अनुवाद
हे श्रीकृष्ण! जिस प्रकार आपने भीष्म की पुत्री रुक्मिणी को जीत लिया था, उसी प्रकार धर्मात्मा अर्जुन ने पिता की राजधानी में रहते हुए मुझे जीत लिया।
 
Sri Krishna! Just as you conquered Rukmini, the daughter of Bhishma, in the same manner Arjuna, the virtuous one, conquered me while I was in my father's capital.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)