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mahabharat 3.12.110: इस प्रकार हिडिम्बा को मारकर भीमसेन अपने भाइयों के साथ हिडिम्बा को आगे ले चले। उसी हिडिम्बा से घटोत्कच उत्पन्न हुआ ॥110॥   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 110
 
 
श्लोक  3.12.110 
हत्वा हिडिम्बं भीमोऽथ प्रस्थितो भ्रातृभि: सह।
हिडिम्बामग्रत: कृत्वा यस्यां जातो घटोत्कच:॥ ११०॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार हिडिम्बा को मारकर भीमसेन अपने भाइयों के साथ हिडिम्बा को आगे ले चले। उसी हिडिम्बा से घटोत्कच उत्पन्न हुआ ॥110॥
 
Having killed Hidimba in this manner, Bhimasena proceeded forward with his brothers, taking Hidimba ahead. Ghatotkacha was born from the same Hidimba.॥ 110॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)