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mahabharat 3.12.108: उस समय भीमसेन और हिडिम्बा में, जो सम्पूर्ण अस्त्र-शस्त्रों में निपुण थे, इन्द्र और वृत्रासुर के बीच हुए युद्ध के समान भयंकर और भयंकर युद्ध आरम्भ हो गया ॥108॥   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 108
 
 
श्लोक  3.12.108 
तदाऽऽसीत् तुमुलं युद्धं भीमसेनहिडिम्बयो:।
सर्वास्त्रविदुषोर्घोरं वृत्रवासवयोरिव॥ १०८॥
 
 
अनुवाद
उस समय भीमसेन और हिडिम्बा में, जो सम्पूर्ण अस्त्र-शस्त्रों में निपुण थे, इन्द्र और वृत्रासुर के बीच हुए युद्ध के समान भयंकर और भयंकर युद्ध आरम्भ हो गया ॥108॥
 
At that time, a fierce and dreadful battle like the one between Indra and Vritraasura began between Bhimasena and Hidimba, who were experts in all the weapons. ॥108॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)