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mahabharat 3.12.107: राक्षस ने अपने हाथ से भीमसेन का हाथ पकड़ लिया; यह बात बलवान भीमसेन से सहन न हुई। वे वहीं क्रोधित हो उठे। 107.   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 107
 
 
श्लोक  3.12.107 
गृहीतं पाणिना पाणिं भीमसेनस्य रक्षसा।
नामृष्यत महाबाहुस्तत्राक्रुध्यद् वृकोदर:॥ १०७॥
 
 
अनुवाद
राक्षस ने अपने हाथ से भीमसेन का हाथ पकड़ लिया; यह बात बलवान भीमसेन से सहन न हुई। वे वहीं क्रोधित हो उठे। 107.
 
The demon held Bhimasena's hand with his own hand; this thing could not be tolerated by the powerful Bhimasena. He became enraged right there. 107.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)