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mahabharat 3.12.104: उसी समय वह नरभक्षी राक्षस जोर से दहाड़ता हुआ बड़े वेग से भीमसेन की ओर दौड़ा।   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  3.12.104 
स नादान् विनदन् घोरान् राक्षस: पुरुषादक:।
अभ्यद्रवत वेगेन भीमसेनं तदा किल॥ १०४॥
 
 
अनुवाद
उसी समय वह नरभक्षी राक्षस जोर से दहाड़ता हुआ बड़े वेग से भीमसेन की ओर दौड़ा।
 
At that very moment the cannibalistic demon roared loudly and ran towards Bhimasena with great speed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)