Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.12.103: मनस्विनी और अनिन्दिता हिडिम्बा के प्रेममय हृदय के कारण उन्होंने दया करके भीमसेन को यह क्रूर सन्देश बताना उचित नहीं समझा ॥103॥   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  3.12.103 
सा कृपासंगृहीतेन हृदयेन मनस्विनी।
नैनमैच्छत् तदाख्यातुमनुक्रोशादनिन्दिता॥ १०३॥
 
 
अनुवाद
मनस्विनी और अनिन्दिता हिडिम्बा के प्रेममय हृदय के कारण उन्होंने दया करके भीमसेन को यह क्रूर सन्देश बताना उचित नहीं समझा ॥103॥
 
Due to the loving hearts of Manaswini and Anindita Hidimba, out of pity they did not consider it appropriate to tell this cruel message to Bhimsen. 103॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)