श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 119: प्रभासतीर्थमें बलरामजीके पाण्डवोंके प्रति सहानुभूतिसूचक दु:खपूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.119.9 
कथं नु भीष्मश्च कृपश्च विप्रो
द्रोणश्च राजा च कुलस्य वृद्ध:।
प्रव्राज्य पार्थान् सुखमाप्नुवन्ति
धिक् पापबुद्धीन् भरतप्रधानान्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
पितामह भीष्म, ब्राह्मण कृपाचार्य, द्रोण और कुल के ज्येष्ठ राजा धृतराष्ट्र - ये कुन्ती के पुत्रों को राज्य से निकाल कर किस प्रकार सुख पाते हैं? भरतकुल के इन श्रेष्ठ पुरुषों को धिक्कार है, क्योंकि इनके मन पाप में लगे हुए हैं॥9॥
 
Grandfather Bhishma, Brahmin Kripacharya, Drona and the elder king of the clan Dhritarashtra - how do they find happiness by expelling Kunti's sons from the kingdom? Shame on these prominent persons of the Bharata clan because their minds are engaged in sin.॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)