श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 119: प्रभासतीर्थमें बलरामजीके पाण्डवोंके प्रति सहानुभूतिसूचक दु:खपूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.119.4 
ततो गोक्षीरकुन्देन्दुमृणालरजतप्रभ:।
वनमाली हली रामो बभाषे पुष्करेक्षणम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात, गोदुग्ध, कुण्डुकसुम, चन्द्रमा, मृणाल और चाँदी के समान वनमाला से विभूषित हलधर बलरामजी ने कमलनेत्रों वाले भगवान श्रीकृष्ण से कहा॥4॥
 
Thereafter, Haldhar Balram, adorned with Godudgdha, Kunduksum, Moon, Mrinal (Lotus of Lotus) and silver-like forest garland, said to Lord Krishna with lotus eyes. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)