Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.119.17-18: वही वीर और पराक्रमी योद्धा वृकोदर, जो पूर्व दिशा में युद्ध में केवल एक रथ द्वारा अनेक राजाओं को उनके सेवकों सहित परास्त करके सकुशल लौट आया था, आज छाल के वस्त्र धारण करके वन में कष्ट भोग रहा है। उस वीर योद्धा सहदेव को देखो, जिसने समुद्र तट पर युद्ध करने आए दक्षिण के समस्त राजाओं को जीत लिया था - आज वही तपस्वी वेश में कष्ट भोग रहा है॥17-18॥ | mahabharat अध्याय 3.119: प्रभासतीर्थमें बलरामजीके पाण्डवोंके प्रति सहानुभूतिसूचक दु:खपूर्ण उद्गार । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वही वीर और पराक्रमी योद्धा वृकोदर, जो पूर्व दिशा में युद्ध में केवल एक रथ द्वारा अनेक राजाओं को उनके सेवकों सहित परास्त करके सकुशल लौट आया था, आज छाल के वस्त्र धारण करके वन में कष्ट भोग रहा है। उस वीर योद्धा सहदेव को देखो, जिसने समुद्र तट पर युद्ध करने आए दक्षिण के समस्त राजाओं को जीत लिया था - आज वही तपस्वी वेश में कष्ट भोग रहा है॥17-18॥
The same valiant and powerful warrior Vrikodara who had returned safely after defeating many kings along with their servants in the war in the east with only one chariot, is today suffering in the forest wearing bark clothes. Look at that valiant warrior Sahadeva who had conquered all the kings of the south who had come to fight on the sea-shore - today he is suffering in the garb of an ascetic.॥ 17-18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥