श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 119: प्रभासतीर्थमें बलरामजीके पाण्डवोंके प्रति सहानुभूतिसूचक दु:खपूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.119.15 
स क्षुत्पिपासाध्वकृशस्तरस्वी
समेत्य नानायुधबाणपाणि:।
वने स्मरन् वासमिमं सुघोरं
शेषं न कुर्यादिति निश्चितं मे॥ १५॥
 
 
अनुवाद
इन दिनों वही महाबली भीम भूख-प्यास और यात्रा की थकान से दुर्बल हो गए हैं। इस भयंकर वनवास को स्मरण करके जब वे हाथों में नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र और धनुष-बाण लेकर शत्रुओं पर आक्रमण करेंगे, तब किसी को भी जीवित नहीं छोड़ेंगे - यह मेरा निश्चय है॥ 15॥
 
These days the same mighty Bhima has become weak due to hunger and thirst and the fatigue of travelling. Remembering this dreadful exile, when he will attack the enemies with various kinds of weapons and bow and arrow in his hands, then he will not leave anyone alive - this is my resolve.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)