श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 119: प्रभासतीर्थमें बलरामजीके पाण्डवोंके प्रति सहानुभूतिसूचक दु:खपूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.119.11 
नासौ धिया सम्प्रति पश्यति स्म
किं नाम कृत्वाहमचक्षुरेवम्।
जात: पृथिव्यामिति पार्थिवेषु
प्रव्राज्य कौन्तेयमिति स्म राज्यात्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
अब भी वह अपनी बुद्धिमान आँखों से यह नहीं देख पा रहा है कि किस पाप के कारण मैं इस प्रकार अंधा हो गया हूँ और जब मैं कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर को राज्य से निकाल कर पृथ्वी के राजाओं के बीच पुनः जन्म लूँगा, तब मेरी क्या दशा होगी?॥ 11॥
 
Even now, he is unable to see with his intelligent eyes as to which sin has caused me to become blind in this manner and what will be my condition when I will be born again among the kings of the Earth after expelling Kunti's son Yudhishthir from the kingdom?॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)