Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.119.1-2: जनमेजय ने पूछा - हे तपस्वी! प्रभास तीर्थ पहुँचकर पाण्डवों और वृष्णियों ने क्या किया? वहाँ उनके बीच किस प्रकार का वार्तालाप हुआ? वे सभी महापुरुष यादव और पाण्डव समस्त शास्त्रों के विद्वान् और एक-दूसरे के हितैषी थे, (अतः उनमें क्या वार्तालाप हुआ? यह मैं जानना चाहता हूँ)॥1-2॥ | mahabharat अध्याय 3.119: प्रभासतीर्थमें बलरामजीके पाण्डवोंके प्रति सहानुभूतिसूचक दु:खपूर्ण उद्गार । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जनमेजय उवाच
प्रभासतीर्थमासाद्य पाण्डवा वृष्णयस्तथा।
किमकुर्वन् कथाश्चैषां कास्तत्रासंस्तपोधन॥ १॥
ते हि सर्वे महात्मान: सर्वशास्त्रविशारदा:।
वृष्णय: पाण्डवाश्चैव सुहृदश्च परस्परम्॥ २॥
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा - हे तपस्वी! प्रभास तीर्थ पहुँचकर पाण्डवों और वृष्णियों ने क्या किया? वहाँ उनके बीच किस प्रकार का वार्तालाप हुआ? वे सभी महापुरुष यादव और पाण्डव समस्त शास्त्रों के विद्वान् और एक-दूसरे के हितैषी थे, (अतः उनमें क्या वार्तालाप हुआ? यह मैं जानना चाहता हूँ)॥1-2॥
Janamejaya asked - O ascetic! What did the Pandavas and the Vrishnis do after reaching Prabhas Tirtha? What kind of conversation took place between them there? All those great Yadavas and Pandavas were learned in all the scriptures and well wishers of each other, (so what conversation took place between them? This I want to know)॥ 1-2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥