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mahabharat 3.118.9: वहाँ समुद्र का एक भाग पार करके वे एक ऐसे वन में पहुँचे जो संसार भर में प्रसिद्ध था। प्राचीन काल में वहाँ देवताओं ने तपस्या की थी और धर्मात्मा राजाओं ने यज्ञ किये थे॥9॥   |   mahabharat अध्याय 3.118: युधिष्ठिरका विभिन्न तीर्थोंमें होते हुए प्रभासक्षेत्रमें पहुँचकर तपस्यामें प्रवृत्त होना और यादवोंका पाण्डवोंसे मिलना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 118: युधिष्ठिरका विभिन्न तीर्थोंमें होते हुए प्रभासक्षेत्रमें पहुँचकर तपस्यामें प्रवृत्त होना और यादवोंका पाण्डवोंसे मिलना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.118.9 
तत्रोदधे: कंचिदतीत्य देशं
ख्यातं पृथिव्यां वनमाससाद।
तप्तं सुरैस्तत्र तप: पुरस्ता-
दिष्टं तथा पुण्यपरैर्नरेन्द्रै:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
वहाँ समुद्र का एक भाग पार करके वे एक ऐसे वन में पहुँचे जो संसार भर में प्रसिद्ध था। प्राचीन काल में वहाँ देवताओं ने तपस्या की थी और धर्मात्मा राजाओं ने यज्ञ किये थे॥9॥
 
There, after crossing a part of the ocean, they came to a forest which was famous all over the world. In ancient times, the gods had performed penance there and pious kings had performed yajnas.॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)