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mahabharat 3.118.8: राजन! समुद्रसम्बन्धी तथा अन्य अनेक पवित्र तीर्थस्थानों का भ्रमण करते हुए पूर्णकाम राजा युधिष्ठिर ने अत्यन्त पुण्यशाली शूर्पणकतीर्थ का दर्शन किया॥8॥   |   mahabharat अध्याय 3.118: युधिष्ठिरका विभिन्न तीर्थोंमें होते हुए प्रभासक्षेत्रमें पहुँचकर तपस्यामें प्रवृत्त होना और यादवोंका पाण्डवोंसे मिलना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 118: युधिष्ठिरका विभिन्न तीर्थोंमें होते हुए प्रभासक्षेत्रमें पहुँचकर तपस्यामें प्रवृत्त होना और यादवोंका पाण्डवोंसे मिलना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.118.8 
स तानि तीर्थानि च सागरस्य
पुण्यानि चान्यानि बहूनि राजन्।
क्रमेण गच्छन् परिपूर्णकाम:
शूर्पारकं पुण्यतमं ददर्श॥ ८॥
 
 
अनुवाद
राजन! समुद्रसम्बन्धी तथा अन्य अनेक पवित्र तीर्थस्थानों का भ्रमण करते हुए पूर्णकाम राजा युधिष्ठिर ने अत्यन्त पुण्यशाली शूर्पणकतीर्थ का दर्शन किया॥8॥
 
Rajan! While visiting Samudra-related and many other holy places of pilgrimage, Purnakama King Yudhishthir saw the very virtuous Shurparakatirtha. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)