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mahabharat 3.118.3: वहाँ पर युधिष्ठिर ने स्नान किया, देवताओं और पितरों का तर्पण किया, श्रेष्ठ ब्राह्मणों को धन दान किया और गोदावरी नदी की ओर चल पड़े, जो समुद्र से होकर बहती है।   |   mahabharat अध्याय 3.118: युधिष्ठिरका विभिन्न तीर्थोंमें होते हुए प्रभासक्षेत्रमें पहुँचकर तपस्यामें प्रवृत्त होना और यादवोंका पाण्डवोंसे मिलना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 118: युधिष्ठिरका विभिन्न तीर्थोंमें होते हुए प्रभासक्षेत्रमें पहुँचकर तपस्यामें प्रवृत्त होना और यादवोंका पाण्डवोंसे मिलना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  3.118.3 
तत्रापि चाप्लुत्य महानुभाव:
संतर्पयामास पितॄन् सुरांश्च।
द्विजातिमुख्येषु धनं विसृज्य
गोदावरीं सागरगामगच्छत्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वहाँ पर युधिष्ठिर ने स्नान किया, देवताओं और पितरों का तर्पण किया, श्रेष्ठ ब्राह्मणों को धन दान किया और गोदावरी नदी की ओर चल पड़े, जो समुद्र से होकर बहती है।
 
The noble Yudhishthira bathed there, performed oblations to the gods and forefathers, donated money to the best of the Brahmins and proceeded towards the river Godavari, which flows through the sea.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)