Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.118.22: तत्पश्चात्, राजा युधिष्ठिर ने अत्यन्त आश्वस्त होकर यादवों को शत्रुओं के समस्त कर्मों का वर्णन सुनाया और अपने वनवास का भी समाचार सुनाया। साथ ही, उन्होंने बड़ी प्रसन्नता के साथ यह भी बताया कि अर्जुन दिव्यास्त्र प्राप्त करने के लिए इन्द्रलोक चले गए हैं।   |   mahabharat अध्याय 3.118: युधिष्ठिरका विभिन्न तीर्थोंमें होते हुए प्रभासक्षेत्रमें पहुँचकर तपस्यामें प्रवृत्त होना और यादवोंका पाण्डवोंसे मिलना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 118: युधिष्ठिरका विभिन्न तीर्थोंमें होते हुए प्रभासक्षेत्रमें पहुँचकर तपस्यामें प्रवृत्त होना और यादवोंका पाण्डवोंसे मिलना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.118.22 
तेषां स सर्वं चरितं परेषां
वने च वासं परमप्रतीत:।
अस्त्रार्थमिन्द्रस्य गतं च पार्थं
निवेशनं हृष्टमना: शशंस॥ २२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, राजा युधिष्ठिर ने अत्यन्त आश्वस्त होकर यादवों को शत्रुओं के समस्त कर्मों का वर्णन सुनाया और अपने वनवास का भी समाचार सुनाया। साथ ही, उन्होंने बड़ी प्रसन्नता के साथ यह भी बताया कि अर्जुन दिव्यास्त्र प्राप्त करने के लिए इन्द्रलोक चले गए हैं।
 
Thereafter, King Yudhishthira, being very confident, told the Yadavas about all the deeds of the enemies and also told them about his exile. Along with this, he also informed them with great happiness that Arjuna has gone to Indra Loka to obtain divine weapons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)