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mahabharat 3.118.21: राजन! पाण्डुपुत्रों से प्रसन्न होकर यादवों ने भी उन सबका यथोचित सत्कार किया और फिर जैसे देवता इन्द्र को चारों ओर से घेर लेते हैं, उसी प्रकार उन्होंने धर्मराज युधिष्ठिर को चारों ओर से घेर लिया॥21॥   |   mahabharat अध्याय 3.118: युधिष्ठिरका विभिन्न तीर्थोंमें होते हुए प्रभासक्षेत्रमें पहुँचकर तपस्यामें प्रवृत्त होना और यादवोंका पाण्डवोंसे मिलना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 118: युधिष्ठिरका विभिन्न तीर्थोंमें होते हुए प्रभासक्षेत्रमें पहुँचकर तपस्यामें प्रवृत्त होना और यादवोंका पाण्डवोंसे मिलना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.118.21 
ते चापि सर्वान् प्रतिपूज्य पार्थां-
स्तै: सत्कृता: पाण्डुसुतैस्तथैव।
युधिष्ठिरं सम्परिवार्य राज-
न्नुपाविशन् देवगणा यथेन्द्रम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
राजन! पाण्डुपुत्रों से प्रसन्न होकर यादवों ने भी उन सबका यथोचित सत्कार किया और फिर जैसे देवता इन्द्र को चारों ओर से घेर लेते हैं, उसी प्रकार उन्होंने धर्मराज युधिष्ठिर को चारों ओर से घेर लिया॥21॥
 
Rajan! Being pleased by the sons of Pandu, the Yadavas also honored them all appropriately and then just as the gods sit around Indra, in the same way they surrounded Dharmaraja Yudhishthir from all sides. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)