Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.118.20: (उस महान् संकट में भी) महाराज युधिष्ठिर ने अपना धैर्य नहीं खोया। वह बलराम, श्रीकृष्ण, प्रद्युम्न, साम्ब, सात्यकि तथा अन्य वृष्णि कुल के लोगों के पास गये और धर्म के अनुसार उनका सत्कार किया। | mahabharat अध्याय 3.118: युधिष्ठिरका विभिन्न तीर्थोंमें होते हुए प्रभासक्षेत्रमें पहुँचकर तपस्यामें प्रवृत्त होना और यादवोंका पाण्डवोंसे मिलना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत: स रामं च जनार्दनं च
कार्ष्णिं च साम्बं च शिनेश्च पौत्रम्।
अन्यांश्च वृष्णीनुपगम्य पूजां
चक्रे यथाधर्ममहीनसत्त्व:॥ २०॥
अनुवाद
(उस महान् संकट में भी) महाराज युधिष्ठिर ने अपना धैर्य नहीं खोया। वह बलराम, श्रीकृष्ण, प्रद्युम्न, साम्ब, सात्यकि तथा अन्य वृष्णि कुल के लोगों के पास गये और धर्म के अनुसार उनका सत्कार किया।
(Even in that great crisis) Maharaja Yudhishthira did not lose his patience. He went to Balarama, Shri Krishna, Pradyumna, Sambha, Satyaki and other Vrishni clan people and honoured them according to the Dharma.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥