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mahabharat 3.118.17: धर्मात्माओं में श्रेष्ठ युधिष्ठिर वहाँ बारह दिन तक जल और वायु के बिना रहते थे। वे दिन-रात स्नान करते, अग्नि जलाकर तपस्या करते थे।॥ 17॥   |   mahabharat अध्याय 3.118: युधिष्ठिरका विभिन्न तीर्थोंमें होते हुए प्रभासक्षेत्रमें पहुँचकर तपस्यामें प्रवृत्त होना और यादवोंका पाण्डवोंसे मिलना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 118: युधिष्ठिरका विभिन्न तीर्थोंमें होते हुए प्रभासक्षेत्रमें पहुँचकर तपस्यामें प्रवृत्त होना और यादवोंका पाण्डवोंसे मिलना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.118.17 
स द्वादशाहं जलवायुभक्ष:
कुर्वन् क्षपाह:सु तदाभिषेकम्।
समन्ततोऽग्नीनुपदीपयित्वा
तेपे तपो धर्मभृतां वरिष्ठ:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
धर्मात्माओं में श्रेष्ठ युधिष्ठिर वहाँ बारह दिन तक जल और वायु के बिना रहते थे। वे दिन-रात स्नान करते, अग्नि जलाकर तपस्या करते थे।॥ 17॥
 
Yudhishthira, the best of the virtuous, lived there for twelve days on nothing but water and air, bathing during the day and night and lighting a fire around him and performing austerities.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)