Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.118.14: उन तीर्थस्थानों के निकट रहने वाले विद्वान ब्राह्मणों को वस्त्राभूषणों से अलंकृत करके तथा उन्हें बहुमूल्य रत्न प्रदान करके महाराज युधिष्ठिर वहाँ के समस्त तीर्थस्थानों में स्नान करके पुनः शूर्पणखा क्षेत्र में लौट आए॥ 14॥ | mahabharat अध्याय 3.118: युधिष्ठिरका विभिन्न तीर्थोंमें होते हुए प्रभासक्षेत्रमें पहुँचकर तपस्यामें प्रवृत्त होना और यादवोंका पाण्डवोंसे मिलना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तेषूपवासान् विबुधानुपोष्य
दत्त्वा च रत्नानि महान्ति राजा।
तीर्थेषु सर्वेषु परिप्लुताङ्ग:
पुन: स शूर्पारकमाजगाम॥ १४॥
अनुवाद
उन तीर्थस्थानों के निकट रहने वाले विद्वान ब्राह्मणों को वस्त्राभूषणों से अलंकृत करके तथा उन्हें बहुमूल्य रत्न प्रदान करके महाराज युधिष्ठिर वहाँ के समस्त तीर्थस्थानों में स्नान करके पुनः शूर्पणखा क्षेत्र में लौट आए॥ 14॥
Having adorned the learned Brahmins residing near those sacred places with clothes and ornaments, and having presented them with precious gems, Maharaja Yudhishthira took bath in all the sacred places there, he again returned to the Shurparaka area.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥