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mahabharat 3.116.9: उसे धैर्यहीन तथा ब्राह्मणत्व से रहित देखकर उन महाबली ऋषि ने उसकी निन्दा करते हुए उसे धिक्कारा।   |   mahabharat अध्याय 3.116: पिताकी आज्ञासे परशुरामजीका अपनी माताका मस्तक काटना और उन्हींके वरदानसे पुन: जिलाना, परशुरामजीद्वारा कार्तवीर्य-अर्जुनका वध और उसके पुत्रोंद्वारा जमदग्नि मुनिकी हत्या   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 116: पिताकी आज्ञासे परशुरामजीका अपनी माताका मस्तक काटना और उन्हींके वरदानसे पुन: जिलाना, परशुरामजीद्वारा कार्तवीर्य-अर्जुनका वध और उसके पुत्रोंद्वारा जमदग्नि मुनिकी हत्या  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.116.9 
स तां दृष्ट्वा च्युतां धैर्याद् ब्राह्मॺा लक्ष्म्या विवर्जिताम्।
धिक्छब्देन महातेजा गर्हयामास वीर्यवान्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उसे धैर्यहीन तथा ब्राह्मणत्व से रहित देखकर उन महाबली ऋषि ने उसकी निन्दा करते हुए उसे धिक्कारा।
 
Seeing her bereft of patience and deprived of Brahmanical power, that mighty and illustrious sage denounced her with reproachful words.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)