Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.116.22: जब परशुराम आश्रम में आए, तो जमदग्नि ने स्वयं उन्हें सारी बात बताई। उनकी नज़र यज्ञ की गाय पर भी पड़ी जो बार-बार रंभा रही थी। इससे वे बहुत क्रोधित हुए। | mahabharat अध्याय 3.116: पिताकी आज्ञासे परशुरामजीका अपनी माताका मस्तक काटना और उन्हींके वरदानसे पुन: जिलाना, परशुरामजीद्वारा कार्तवीर्य-अर्जुनका वध और उसके पुत्रोंद्वारा जमदग्नि मुनिकी हत्या । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आगताय च रामाय तदाचष्ट पिता स्वयम्।
गां च रोरुदतीं दृष्ट्वा कोपो रामं समाविशत्॥ २२॥
अनुवाद
जब परशुराम आश्रम में आए, तो जमदग्नि ने स्वयं उन्हें सारी बात बताई। उनकी नज़र यज्ञ की गाय पर भी पड़ी जो बार-बार रंभा रही थी। इससे वे बहुत क्रोधित हुए।
When Parasurama came to the hermitage, Jamadagni himself told him everything. His eyes also fell on the cow of the sacrifice which was bleating repeatedly. This made him very angry.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥