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mahabharat 3.116.14: "पुत्र, अपनी पापिनी माता को अभी मार डालो और उसके लिए कोई पश्चाताप मत करो।" तब परशुराम ने अपना फरसा उठाया और उसी क्षण उसका सिर काट दिया।   |   mahabharat अध्याय 3.116: पिताकी आज्ञासे परशुरामजीका अपनी माताका मस्तक काटना और उन्हींके वरदानसे पुन: जिलाना, परशुरामजीद्वारा कार्तवीर्य-अर्जुनका वध और उसके पुत्रोंद्वारा जमदग्नि मुनिकी हत्या   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 116: पिताकी आज्ञासे परशुरामजीका अपनी माताका मस्तक काटना और उन्हींके वरदानसे पुन: जिलाना, परशुरामजीद्वारा कार्तवीर्य-अर्जुनका वध और उसके पुत्रोंद्वारा जमदग्नि मुनिकी हत्या  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.116.14 
जहीमां मातरं पापां मा च पुत्र व्यथां कृथा:।
तत आदाय परशुं रामो मातु: शिरोऽहरत्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
"पुत्र, अपनी पापिनी माता को अभी मार डालो और उसके लिए कोई पश्चाताप मत करो।" तब परशुराम ने अपना फरसा उठाया और उसी क्षण उसका सिर काट दिया।
 
"Son, kill your sinful mother right now and do not feel any remorse for her." Then Parasurama took his axe and cut off her head at that very moment.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)