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mahabharat 3.116.11: भगवान जमदग्नि ने एक-एक करके सब पुत्रों को अपनी माता का वध करने की आज्ञा दी, परंतु माता के प्रति अत्यन्त प्रेम के कारण वे कुछ न बोल सके और वहीं मूर्छित-से खड़े रहे॥11॥   |   mahabharat अध्याय 3.116: पिताकी आज्ञासे परशुरामजीका अपनी माताका मस्तक काटना और उन्हींके वरदानसे पुन: जिलाना, परशुरामजीद्वारा कार्तवीर्य-अर्जुनका वध और उसके पुत्रोंद्वारा जमदग्नि मुनिकी हत्या   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 116: पिताकी आज्ञासे परशुरामजीका अपनी माताका मस्तक काटना और उन्हींके वरदानसे पुन: जिलाना, परशुरामजीद्वारा कार्तवीर्य-अर्जुनका वध और उसके पुत्रोंद्वारा जमदग्नि मुनिकी हत्या  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.116.11 
तानानुपूर्व्याद् भगवान् वधे मातुरचोदयत्।
न च ते जातसंस्नेहा: किंचिदूचुर्विचेतस:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
भगवान जमदग्नि ने एक-एक करके सब पुत्रों को अपनी माता का वध करने की आज्ञा दी, परंतु माता के प्रति अत्यन्त प्रेम के कारण वे कुछ न बोल सके और वहीं मूर्छित-से खड़े रहे॥11॥
 
Lord Jamadagni ordered all the sons one by one to kill their mother, but due to the overwhelming love for their mother, they could not say anything and stood there as if unconscious. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)