श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 116: पिताकी आज्ञासे परशुरामजीका अपनी माताका मस्तक काटना और उन्हींके वरदानसे पुन: जिलाना, परशुरामजीद्वारा कार्तवीर्य-अर्जुनका वध और उसके पुत्रोंद्वारा जमदग्नि मुनिकी हत्या  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.116.1 
अकृतव्रण उवाच
स वेदाध्ययने युक्तो जमदग्निर्महातपा:।
तपस्तेपे ततो देवान्नियमाद् वशमानयत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
अकृतव्रण कहते हैं- राजन! महातपस्वी जमदग्नि ने वेदों के अध्ययन में तत्पर होकर तपस्या आरम्भ की। तत्पश्चात् शौच, संतोष आदि नियमों का पालन करते हुए उन्होंने समस्त देवताओं को अपने वश में कर लिया। 1॥
 
Akritavran says- Rajan! The great ascetic Jamdagni started penance by getting ready to study the Vedas. Thereafter, by following the rules of cleanliness, satisfaction etc., he brought all the gods under his control. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)