भरतश्रेष्ठ! सूर्य के समान तेजस्वी जमदग्नि की बुद्धि में सम्पूर्ण धनुर्वेद तथा चारों प्रकार के अस्त्र-शस्त्र स्वतः ही प्रकट हो गए ॥45॥
Bharatshrestha! The entire Dhanurveda and all four types of weapons automatically emerged in the intellect of Jamadagni, who was as bright as the Sun. 45॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि तीर्थयात्रापर्वणि लोमशतीर्थयात्रायां कार्तवीर्योपाख्याने पञ्चदशाधिकशततमोऽध्याय:॥ ११५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत तीर्थयात्रापर्वमें लोमशतीर्थयात्राके प्रसंगमें कार्तवीर्योपाख्यानविषयक एक सौ पन्द्रहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ११५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥