Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.115.43: पाण्डुनन्दन! तब भृगुजी ने 'एवमस्तु' कहकर अपनी पुत्रवधू को नमस्कार किया। तत्पश्चात जब प्रसव का समय आया, तब सत्यवती ने जमदग्नि नामक पुत्र को जन्म दिया॥43॥ | mahabharat अध्याय 3.115: अकृतव्रणके द्वारा युधिष्ठिरसे परशुरामजीके उपाख्यानके प्रसंगमें ऋचीक मुनिका गाधिकन्याके साथ विवाह और भृगुऋषिकी कृपासे जमदग्निकी उत्पत्तिका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पाण्डुनन्दन! तब भृगुजी ने 'एवमस्तु' कहकर अपनी पुत्रवधू को नमस्कार किया। तत्पश्चात जब प्रसव का समय आया, तब सत्यवती ने जमदग्नि नामक पुत्र को जन्म दिया॥43॥
Pandunandan! Then Bhriguji greeted her daughter-in-law by saying 'Evamastu'. After that, when the time of delivery came, Satyavati gave birth to a son named Jamdagni. 43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥