श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 115: अकृतव्रणके द्वारा युधिष्ठिरसे परशुरामजीके उपाख्यानके प्रसंगमें ऋचीक मुनिका गाधिकन्याके साथ विवाह और भृगुऋषिकी कृपासे जमदग्निकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  3.115.41 
क्षत्रियो ब्राह्मणाचारो मातुस्तव सुतो महान्।
भविष्यति महावीर्य: साधूनां मार्गमास्थित:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
और तुम्हारी माता का पुत्र क्षत्रिय होकर भी ब्राह्मणों का आचार और विचार रखेगा। वह परम वीर बालक ऋषियों और मुनियों के मार्ग का अनुसरण करेगा।॥41॥
 
‘And your mother's son, despite being a Kshatriya, will follow the conduct and thinking of a Brahmin. That very valiant boy will follow the path of sages and saints.'॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)