Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.115.39-40: उस समय महाबली भृगु ने अपनी पुत्रवधू सत्यवती से कहा, 'भद्रे! तुम्हारी माता ने पशुभक्षण और वृक्षाश्रम के नियमों में फेरबदल करके तुम्हारे साथ छल किया है। शुभ्रू! इस भूल के कारण तुम्हारा पुत्र ब्राह्मण होते हुए भी क्षत्रिय का आचार और विचार रखेगा।' 39-40. | mahabharat अध्याय 3.115: अकृतव्रणके द्वारा युधिष्ठिरसे परशुरामजीके उपाख्यानके प्रसंगमें ऋचीक मुनिका गाधिकन्याके साथ विवाह और भृगुऋषिकी कृपासे जमदग्निकी उत्पत्तिका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस समय महाबली भृगु ने अपनी पुत्रवधू सत्यवती से कहा, 'भद्रे! तुम्हारी माता ने पशुभक्षण और वृक्षाश्रम के नियमों में फेरबदल करके तुम्हारे साथ छल किया है। शुभ्रू! इस भूल के कारण तुम्हारा पुत्र ब्राह्मण होते हुए भी क्षत्रिय का आचार और विचार रखेगा।' 39-40.
At that time, the mighty Bhrigu said to his daughter-in-law Satyavati, 'Bhadra! Your mother has deceived you by making changes in the rules of eating animals and embracing trees. Subhru! Due to this mistake, your son, despite being a Brahmin, will have the conduct and thinking of a Kshatriya.' 39-40.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥