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mahabharat 3.115.38: तत्पश्चात् बहुत दिन बीत जाने पर भगवान् भृगु अपनी दिव्य ज्ञानशक्ति से सब कुछ जानकर पुनः वहाँ आये।   |   mahabharat अध्याय 3.115: अकृतव्रणके द्वारा युधिष्ठिरसे परशुरामजीके उपाख्यानके प्रसंगमें ऋचीक मुनिका गाधिकन्याके साथ विवाह और भृगुऋषिकी कृपासे जमदग्निकी उत्पत्तिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 115: अकृतव्रणके द्वारा युधिष्ठिरसे परशुरामजीके उपाख्यानके प्रसंगमें ऋचीक मुनिका गाधिकन्याके साथ विवाह और भृगुऋषिकी कृपासे जमदग्निकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  3.115.38 
तत: पुन: स भगवान् काले बहुतिथे गते।
दिव्यज्ञानाद् विदित्वा तु भगवानागत: पुन:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् बहुत दिन बीत जाने पर भगवान् भृगु अपनी दिव्य ज्ञानशक्ति से सब कुछ जानकर पुनः वहाँ आये।
 
Thereafter, after many days had passed, Lord Bhrigu, having understood everything through his divine power of knowledge, came there again. 38.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)