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mahabharat 3.115.36: भद्रे! मैंने परमात्मा का ध्यान करके तुम्हारे और तुम्हारी माता के लिए दो चरु तैयार किए हैं। 36॥   |   mahabharat अध्याय 3.115: अकृतव्रणके द्वारा युधिष्ठिरसे परशुरामजीके उपाख्यानके प्रसंगमें ऋचीक मुनिका गाधिकन्याके साथ विवाह और भृगुऋषिकी कृपासे जमदग्निकी उत्पत्तिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 115: अकृतव्रणके द्वारा युधिष्ठिरसे परशुरामजीके उपाख्यानके प्रसंगमें ऋचीक मुनिका गाधिकन्याके साथ विवाह और भृगुऋषिकी कृपासे जमदग्निकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  3.115.36 
चरुद्वयमिदं भद्रे जनन्याश्च तवैव च।
विश्वमावर्तयित्वा तु मया यत्नेन साधितम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
भद्रे! मैंने परमात्मा का ध्यान करके तुम्हारे और तुम्हारी माता के लिए दो चरु तैयार किए हैं। 36॥
 
Bhadre! Thinking about the Supreme Being, I have carefully prepared two charus for you and your mother. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)