Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.115.3-4: उन सबसे मिलकर राजा युधिष्ठिर ने हाथ जोड़कर उन्हें प्रणाम करके परशुराम के सेवक वीरवर अकृतव्रण से पूछा - 'भगवान परशुराम इन तपस्वी मुनियों के समक्ष कब प्रकट होंगे? उसी कारण मेरी भी भगवान भार्गव के दर्शन की इच्छा है।'॥3-4॥ | mahabharat अध्याय 3.115: अकृतव्रणके द्वारा युधिष्ठिरसे परशुरामजीके उपाख्यानके प्रसंगमें ऋचीक मुनिका गाधिकन्याके साथ विवाह और भृगुऋषिकी कृपासे जमदग्निकी उत्पत्तिका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उन सबसे मिलकर राजा युधिष्ठिर ने हाथ जोड़कर उन्हें प्रणाम करके परशुराम के सेवक वीरवर अकृतव्रण से पूछा - 'भगवान परशुराम इन तपस्वी मुनियों के समक्ष कब प्रकट होंगे? उसी कारण मेरी भी भगवान भार्गव के दर्शन की इच्छा है।'॥3-4॥
Having met them all, King Yudhishthira folded his hands and bowed to them, he asked Parashurama's servant Veervara Akritavrana - 'When will Lord Parashurama appear before these ascetic saints? For the same reason, I too wish to see Lord Bhargava.'॥ 3-4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥