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mahabharat 3.115.28-29: जिस स्थान पर वे काले कान वाले घोड़े प्रकट हुए, वह स्थान अश्वतीर्थ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। तत्पश्चात, राजा गाधि ने कर के रूप में एक हज़ार काले कान वाले घोड़े प्राप्त किए और अपनी पुत्री सत्यवती का विवाह गंगा तट पर स्थित कन्याकुब्ज नगर में ऋषि ऋचीक के साथ कर दिया। उस समय देवतागण बारात में अतिथि थे। उन्हें देखकर देवतागण वहाँ से चले गए।   |   mahabharat अध्याय 3.115: अकृतव्रणके द्वारा युधिष्ठिरसे परशुरामजीके उपाख्यानके प्रसंगमें ऋचीक मुनिका गाधिकन्याके साथ विवाह और भृगुऋषिकी कृपासे जमदग्निकी उत्पत्तिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 115: अकृतव्रणके द्वारा युधिष्ठिरसे परशुरामजीके उपाख्यानके प्रसंगमें ऋचीक मुनिका गाधिकन्याके साथ विवाह और भृगुऋषिकी कृपासे जमदग्निकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 28-29
 
 
श्लोक  3.115.28-29 
तदश्वतीर्थं विख्यातमुत्थिता यत्र ते हया:।
गङ्गायां कान्यकुब्जे वै ददौ सत्यवतीं तदा॥ २८॥
ततो गाधि: सुतां चास्मै जन्याश्चासन् सुरास्तदा।
लब्ध्वा हयसहस्रं तु तांश्च दष्ट्वा दिवौकस:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जिस स्थान पर वे काले कान वाले घोड़े प्रकट हुए, वह स्थान अश्वतीर्थ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। तत्पश्चात, राजा गाधि ने कर के रूप में एक हज़ार काले कान वाले घोड़े प्राप्त किए और अपनी पुत्री सत्यवती का विवाह गंगा तट पर स्थित कन्याकुब्ज नगर में ऋषि ऋचीक के साथ कर दिया। उस समय देवतागण बारात में अतिथि थे। उन्हें देखकर देवतागण वहाँ से चले गए।
 
The place where those black-eared horses appeared became famous by the name of Ashwatirtha. Thereafter, King Gadhi received a thousand black-eared horses as tax and married his daughter Satyavati to sage Richik in Kanyakubja city on the bank of Ganga. At that time, the gods were the wedding guests. The gods left the place after seeing them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)