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mahabharat 3.115.25: ऋचीक ने कहा, "हे राजन! मैं आपको एक ओर से काले कानों वाले एक हजार तीव्रगामी पाण्डुरंग घोड़े प्रदान करता हूँ। आपकी पुत्री मेरी पत्नी बनेगी।"   |   mahabharat अध्याय 3.115: अकृतव्रणके द्वारा युधिष्ठिरसे परशुरामजीके उपाख्यानके प्रसंगमें ऋचीक मुनिका गाधिकन्याके साथ विवाह और भृगुऋषिकी कृपासे जमदग्निकी उत्पत्तिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 115: अकृतव्रणके द्वारा युधिष्ठिरसे परशुरामजीके उपाख्यानके प्रसंगमें ऋचीक मुनिका गाधिकन्याके साथ विवाह और भृगुऋषिकी कृपासे जमदग्निकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.115.25 
ऋचीक उवाच
एकत: श्यामकर्णानां पाण्डुराणां तरस्विनाम्।
दास्याम्यश्वसहस्रं ते मम भार्या सुतास्तु ते॥ २५॥
 
 
अनुवाद
ऋचीक ने कहा, "हे राजन! मैं आपको एक ओर से काले कानों वाले एक हजार तीव्रगामी पाण्डुरंग घोड़े प्रदान करता हूँ। आपकी पुत्री मेरी पत्नी बनेगी।"
 
Richik said, "O King! I will offer you a thousand fast horses of Panduranga having dark ears on one side. Your daughter will become my wife."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)