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mahabharat 3.115.19-21: उसी समय इस पृथ्वी पर कान्यकुब्ज देश में एक अत्यंत पराक्रमी राजा राज्य करता था, जो गाधि नाम से प्रसिद्ध था। वह राजधानी छोड़कर वन में चला गया और वहीं रहने लगा। उसके वनवास के समय में एक कन्या उत्पन्न हुई जो अप्सरा के समान सुन्दर थी। भरत! जब वह विवाह योग्य हुई, तब भृगुपुत्र ऋचीक ऋषि ने उसका वरण किया।॥19-21॥   |   mahabharat अध्याय 3.115: अकृतव्रणके द्वारा युधिष्ठिरसे परशुरामजीके उपाख्यानके प्रसंगमें ऋचीक मुनिका गाधिकन्याके साथ विवाह और भृगुऋषिकी कृपासे जमदग्निकी उत्पत्तिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 115: अकृतव्रणके द्वारा युधिष्ठिरसे परशुरामजीके उपाख्यानके प्रसंगमें ऋचीक मुनिका गाधिकन्याके साथ विवाह और भृगुऋषिकी कृपासे जमदग्निकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 19-21
 
 
श्लोक  3.115.19-21 
एतस्मिन्नेव काले तु पृथिव्यां पृथिवीपति:॥ १९॥
कान्यकुब्जे महानासीत् पार्थिव: सुमहाबल:।
गाधीति विश्रुतो लोके वनवासं जगाम ह॥ २०॥
वने तु तस्य वसत: कन्या जज्ञेऽप्सर:समा।
ऋचीको भार्गवस्तां च वरयामास भारत॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उसी समय इस पृथ्वी पर कान्यकुब्ज देश में एक अत्यंत पराक्रमी राजा राज्य करता था, जो गाधि नाम से प्रसिद्ध था। वह राजधानी छोड़कर वन में चला गया और वहीं रहने लगा। उसके वनवास के समय में एक कन्या उत्पन्न हुई जो अप्सरा के समान सुन्दर थी। भरत! जब वह विवाह योग्य हुई, तब भृगुपुत्र ऋचीक ऋषि ने उसका वरण किया।॥19-21॥
 
At the same time, on this earth, a very powerful king ruled in the Kanyakubja country, who was famous by the name of Gadhi. He left the capital and went to the forest and started living there. During his exile, a girl was born who was as beautiful as an Apsara. Bhaarat! When she became eligible for marriage, the sage Richik, son of Bhrigu, chose her.॥19-21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)