Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.115.18-19h: देवेन्द्र ने समस्त प्राणियों के कल्याण के लिए जो कार्य करना आवश्यक था, उसे बताया। तत्पश्चात् विश्वविख्यात भगवान विष्णु ने उस समस्त कार्य को करने का संकल्प लिया और अत्यन्त सुन्दर बदरीतीर्थ की यात्रा की, जहाँ उनका अपना विस्तृत आश्रम था। 18 1/2॥ | mahabharat अध्याय 3.115: अकृतव्रणके द्वारा युधिष्ठिरसे परशुरामजीके उपाख्यानके प्रसंगमें ऋचीक मुनिका गाधिकन्याके साथ विवाह और भृगुऋषिकी कृपासे जमदग्निकी उत्पत्तिका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवेन्द्र ने समस्त प्राणियों के कल्याण के लिए जो कार्य करना आवश्यक था, उसे बताया। तत्पश्चात् विश्वविख्यात भगवान विष्णु ने उस समस्त कार्य को करने का संकल्प लिया और अत्यन्त सुन्दर बदरीतीर्थ की यात्रा की, जहाँ उनका अपना विस्तृत आश्रम था। 18 1/2॥
Devendra explained the work that was necessary to be done for the welfare of all living beings. After that, the world-renowned Lord Vishnu took a vow to do all that work and traveled to the very beautiful Badaritirtha, where he had his own elaborate ashram. 18 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥