Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.115.13-14: महाहृदयी कार्तवीर्य के रथ की गति को कोई नहीं रोक सकता था। उस रथ के प्रभाव और वरदान से बलवान होकर कार्तवीर्य अर्जुन देवताओं, यक्षों और ऋषियों को कुचलते हुए तथा सब प्रकार से समस्त प्राणियों को पीड़ा पहुँचाते हुए सर्वत्र विचरण करने लगे।॥13-14॥ | mahabharat अध्याय 3.115: अकृतव्रणके द्वारा युधिष्ठिरसे परशुरामजीके उपाख्यानके प्रसंगमें ऋचीक मुनिका गाधिकन्याके साथ विवाह और भृगुऋषिकी कृपासे जमदग्निकी उत्पत्तिका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महाहृदयी कार्तवीर्य के रथ की गति को कोई नहीं रोक सकता था। उस रथ के प्रभाव और वरदान से बलवान होकर कार्तवीर्य अर्जुन देवताओं, यक्षों और ऋषियों को कुचलते हुए तथा सब प्रकार से समस्त प्राणियों को पीड़ा पहुँचाते हुए सर्वत्र विचरण करने लगे।॥13-14॥
No one could stop the speed of the chariot of the great-hearted Kartavirya. Empowered by the effect of that chariot and the boon, Kartavirya Arjuna roamed everywhere, trampling the gods, yakshas and sages and also tormenting all living beings in every way.॥ 13-14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥