Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.115.1: वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! उस पर्वत पर एक रात ठहरकर राजा युधिष्ठिर ने अपने भाइयों सहित तपस्वी मुनियों का बहुत आदर-सत्कार किया। | mahabharat अध्याय 3.115: अकृतव्रणके द्वारा युधिष्ठिरसे परशुरामजीके उपाख्यानके प्रसंगमें ऋचीक मुनिका गाधिकन्याके साथ विवाह और भृगुऋषिकी कृपासे जमदग्निकी उत्पत्तिका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! उस पर्वत पर एक रात ठहरकर राजा युधिष्ठिर ने अपने भाइयों सहित तपस्वी मुनियों का बहुत आदर-सत्कार किया।
Vaishmpayana says: Janamejaya! After staying on that mountain for one night, King Yudhishthira along with his brothers honoured the ascetic sages very much.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥