श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 114: युधिष्ठिरका कौशिकी, गंगासागर एवं वैतरणी नदी होते हुए महेन्द्रपर्वतपर गमन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.114.9 
तत: कल्याणरूपाभिर्वाग्भिस्ते रुद्रमस्तुवन्।
इष्टॺा चैनं तर्पयित्वा मानयांचक्रिरे तदा॥ ९॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर उन्होंने शुभ वचनों से भगवान रुद्र की स्तुति की और उन्हें इष्ट (इच्छा) से संतुष्ट करके उस समय उनका विशेष सम्मान किया।
 
Thus saying, he praised Lord Rudra with auspicious words and having satisfied him with Ishtiya (wish), he honoured him specially at that time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)