vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 114: युधिष्ठिरका कौशिकी, गंगासागर एवं वैतरणी नदी होते हुए महेन्द्रपर्वतपर गमन
»
श्लोक 9
श्लोक
3.114.9
तत: कल्याणरूपाभिर्वाग्भिस्ते रुद्रमस्तुवन्।
इष्टॺा चैनं तर्पयित्वा मानयांचक्रिरे तदा॥ ९॥
अनुवाद
ऐसा कहकर उन्होंने शुभ वचनों से भगवान रुद्र की स्तुति की और उन्हें इष्ट (इच्छा) से संतुष्ट करके उस समय उनका विशेष सम्मान किया।
Thus saying, he praised Lord Rudra with auspicious words and having satisfied him with Ishtiya (wish), he honoured him specially at that time.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×