श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 114: युधिष्ठिरका कौशिकी, गंगासागर एवं वैतरणी नदी होते हुए महेन्द्रपर्वतपर गमन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.114.7 
अत्रैव रुद्रो राजेन्द्र पशुमादत्तवान् मखे।
पशुमादाय राजेन्द्र भागोऽयमिति चाब्रवीत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! यहीं पर रुद्रदेव ने यज्ञ में पशु स्वीकार किया था। पशु स्वीकार करने के बाद उन्होंने कहा - 'यह मेरा भाग है।'
 
Rajendra! It was here that Rudradev accepted the animal in the yagya. After accepting the animal he said - 'This is my share'. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)