श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 114: युधिष्ठिरका कौशिकी, गंगासागर एवं वैतरणी नदी होते हुए महेन्द्रपर्वतपर गमन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.114.6 
समानं देवयानेन पथा स्वर्गमुपेयुष:।
अत्र वै ऋषयोऽन्येऽपि पुरा क्रतुभिरीजिरे॥ ६॥
 
 
अनुवाद
स्वर्ग प्राप्ति के इच्छुक पुण्यात्मा पुरुष के लिए यह स्थान देवयान के समान है। प्राचीन काल में ऋषियों तथा अन्य लोगों ने भी यहाँ अनेक यज्ञ किये थे॥6॥
 
This place is like the path of 'Devayan' for a pious person who wants to attain heaven. In ancient times, sages and other people also performed many yagyas here.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)