'हे समुद्र! अग्नि, मित्र (सूर्य) और दिव्य जल- ये सब तुम्हारी योनि (उत्पत्ति-कारण) हैं। तुम सर्वव्यापी परमेश्वर की रेत (वीर्य या शक्ति) हो और तुम ही अमृत के उद्गम स्थान हो।' पाण्डु नन्दन! इस सत्य वाक्य का पाठ करते हुए तुम शीघ्रता से इस वेदी पर बैठो। 27॥
'O sea! Fire, Mitra (Sun) and divine water – all these are your yoni (origin-cause). You are the sand (semen or power) of the omnipresent God and you are the place of origin of nectar.' Pandu Nandan! While reciting this true sentence, you should quickly sit on this altar. 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥