श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 114: युधिष्ठिरका कौशिकी, गंगासागर एवं वैतरणी नदी होते हुए महेन्द्रपर्वतपर गमन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.114.26 
ॐ नमो विश्वगुप्ताय नमो विश्वपराय ते।
सांनिध्यं कुरु देवेश सागरे लवणाम्भसि॥ २६॥
 
 
अनुवाद
(समुद्र में स्नान करते समय निम्नलिखित मंत्र का जाप करके उनकी प्रार्थना करनी चाहिए।) जिनमें सम्पूर्ण जगत समाया हुआ है और जो सबमें श्रेष्ठ हैं, उन भगवान विष्णु को नमस्कार है। हे प्रभु! आप लवण सागर में निवास करें॥ 26॥
 
(While bathing in the sea, one should chant the following mantra to pray to Him.) Salutations to Lord Vishnu, in whom the whole universe is absorbed and who is the best of all. O Lord! May you reside in the salty sea.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)