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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 114: युधिष्ठिरका कौशिकी, गंगासागर एवं वैतरणी नदी होते हुए महेन्द्रपर्वतपर गमन
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श्लोक 24
श्लोक
3.114.24
सैषा सागरमासाद्य राजन् वेदी समाश्रिता।
एतामारुह्य भद्रं ते त्वमेकस्तर सागरम्॥ २४॥
अनुवाद
युधिष्ठिर! यह पृथ्वी वेदीरूपी समुद्र पर टिकी हुई है; तुम्हारा कल्याण हो। तुम अकेले ही इस पर चढ़कर समुद्र को पार कर जाओ॥ 24॥
Yudhishthira! This earth in the form of an altar is resting on the sea; may you be blessed. Climb on it alone and cross the sea.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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