श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 114: युधिष्ठिरका कौशिकी, गंगासागर एवं वैतरणी नदी होते हुए महेन्द्रपर्वतपर गमन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.114.17 
एतत् स्वयम्भुवो राजन् वनं दिव्यं प्रकाशते।
यत्रायजत राजेन्द्र विश्वकर्मा प्रतापवान्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! ब्रह्माजी का यह दिव्य वन जगमगा रहा है; हे राजन! यहीं पर महाबली विश्वकर्मा ने यज्ञ किया था।
 
O King! This divine forest of Brahmaji is shining; O King! It is here that the mighty Vishwakarma has performed a yajna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)